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Soya Mann Jag Jaye

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सोया मन जग जाए मन का अस्तित्व दो चरणों में है यह सोता भी है और जागता भी है। यदि वह सोया नहीं है और जागता रहता है तो इस संदर्भ में मन का अर्थ- ध्यानशक्ति धारित मनुष्य सत्य को सुनता है, उसे पता है लेकिन उस पर विचार नहीं करता है। ध्यान के अभाव में वह नहीं जान पाता है जो सत्य दिख रहा है वह सत्य नहीं है। यह अनुभव के स्तर पर नहीं है।
Language title : सोया मन जग जाए
Author :
Category : Books
Sub Category : Self-Help (Jainism)
Sect :
Language : Hindi
No. of Pages : 279
Keywords : a

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