संस्मरणों का सुंदर संग्रह वाला यह ग्रंथ एक शिष्य का अपने गुरु के प्रति समर्पण है। इतनी साफ़गोई के साथ लिखा गया है कि मेरे जैसा मौसमी श्रावक भी एक बार पढ़कर अपने को मर्म समझने वालों को पंक्ति में खड़ा पा रहा । यह संग्रह समय्क्रमबद्ध तरीके से लिखा गया है और दिगम्बर आचार्य को क़रीब से जानने का अच्छा अवसर प्रदान करता है ।